NCERT Senior Secondary (12th) Private Session 2025-26 Free Open Access

NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6-काव्य भाग – उषा

Class 12: Hindi Aroh Chapter 6 solutions. Complete Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 Notes. NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6-काव्य भाग – उषा NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12...

Curriculum NCERT
Applicable Grade Senior Secondary (12th)
Medium English & Hindi
Resource Format Chapter Q&A / PDF

Textbook Solutions & Academic Guide

Verified chapter-wise solutions, answers, and study notes

Curriculum & Exam Preparation Note: Regular practice of NCERT textbook exercises and chapter-end questions establishes strong conceptual clarity for primary and secondary examinations.

Class 12: Hindi Aroh Chapter 6 solutions. Complete Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 Notes.

NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6-काव्य भाग – उषा

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

कवि परिचय

जीवन परिचय-नई कविता के समर्थकों में शमशेर बहादुर सिंह की एक अलग छवि है। इनका जन्म 13 जनवरी, सन 1911 को देहरादून में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून में ही हुई। इन्होंने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की। चित्रकला में इनकी रुचि प्रारंभ से ही थी। इन्होंने प्रसिद्ध चित्रकार उकील बंधुओं से चित्रकारी में प्रशिक्षण लिया। इन्होंने सुमित्रानंदन पंत के पत्र ‘रूपाभ’ में कार्य किया। 1977 ई. में ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ काव्य-संग्रह पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। इन्हें कबीर सम्मान सहित अनेक पुरस्कार मिले। सन 1993 में अहमदाबाद में इनका देहांत हो गया। रचनाएँ- शमशेर बहादुर सिंह ने अनेक विधाओं में रचना की। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं

(क) कलसंह-कुटकवताएँ कुछऔकवताएँ चुकभी नाह में इने पास आने वातबले कलहुसेह
(ख) संपादन-उर्दू-हिंदी कोश।
(ग) निबंध-संग्रह-दोआब।
(घ) कहानी-संग्रह-प्लाट का मोर्चा।

काव्यगत विशेषताएँ- वैचारिक रूप से प्रगतिशील एवं शिल्पगत रूप से प्रयोगधर्मी कवि शमशेर को एक बिंबधर्मी कवि के रूप में जाना जाता है। इनकी बिंबधर्मिता शब्दों में माध्यम से रंग, रेखा, एवं सूची की अद्भुत कशीदाकारी का माद्दा रखती है। इन्होंने अपनी कविताओं में समाज की यथार्थ स्थिति का भी चित्रण किया है। ये समाज में व्याप्त गरीबी का चित्रण करते हैं। कवि ने प्रकृति के सौंदर्य का सुंदर वर्णन किया है। प्रकृति के नजदीक रहने के कारण इनके प्राकृतिक चित्र अत्यंत जीवंत लगते हैं। ‘उषा’ कविता में प्रात:कालीन वातावरण का सजीव चित्रण है।
शमशेर की कविता एक संधिस्थल पर खड़ी है। यह संधि एक ओर साहित्य, चित्रकला और संगीत की है तो दूसरी ओर मूर्तता और अमूर्तता की तथा ऐंद्रिय और ऐंद्रियेतर की है।
भाषा-शैली- शमशेर बहादुर सिंह ने साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया है। कथा और शिल्प-दोनों ही स्तरों पर इनकी कविता का मिजाज अलग है। उर्दू शायरी के प्रभाव से संज्ञा और विशेषण से अधिक बल सर्वनामों, क्रियाओं, अव्ययों और मुहावरों को दिया है। सचेत इंद्रियों का यह कवि जब प्रेम, पीड़ा, संघर्ष और सृजन को गूँथकर कविता का महल बनाता है तो वह ठोस तो होता ही है, अनुगूंजों से भी भरा होता है।

कविता का प्रतिपादय एवं सार

प्रतिपाद्य- प्रस्तुत कविता ‘उषा’ में कवि शमशेर बहादुर सिंह ने सूर्योदय से ठीक पहले के पल-पल परिवर्तित होने वाली प्रकृति का शब्द-चित्र उकेरा है। कवि ने प्रकृति की गति को शब्दों में बाँधने का अद्भुत प्रयास किया है। कवि भोर की आसमानी गति की धरती के हलचल भरे जीवन से तुलना कर रहा है। इसलिए वह सूर्योदय के साथ एक जीवंत परिवेश की कल्पना करता है जो गाँव की सुबह से जुड़ता है-वहाँ सिल है, राख से लीपा हुआ चौका है और स्लेट की कालिमा पर चाक से रंग मलते अदृश्य बच्चों के नन्हे हाथ हैं। कवि ने नए बिंब, नए उपमान, नए प्रतीकों का प्रयोग किया है।
सार- कवि कहता है कि सूर्योदय से पहले आकाश का रंग गहरे नीले रंग का होता है तथा वह सफेद शंख-सा दिखाई देता है। आकाश का रंग ऐसा लगता है मानो किसी गृहिणी ने राख से चौका लीप दिया हो। सूर्य के ऊपर उठने पर लाली फैलती है तो ऐसा लगता है जैसे काली सिल को किसी ने धो दिया हो या उस पर लाल खड़िया मिट्टी मल दिया हो। नीले आकाश में सूर्य ऐसा लगता है मानो नीले जल में गोरी युवती का शरीर झिलमिला रहा है। सूर्योदय होते ही उषा का यह जादुई प्रभाव समाप्त हो जाता है।

व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सप्रसंग व्याख्या कीजिए और नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1.

प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ 

राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है) (पृष्ठ-36)

शब्दार्थ- भोर-प्रभात । नभ-आकाश। चौका-रसोई बनाने का स्थान।
प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित ‘उषा’ कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। कविता में कवि ने सूर्योदय से पहले के वातावरण का सुंदर चित्र उकेरा है। इस अंश में सूर्योदय का मनोहारी वर्णन किया गया है।
व्याख्या- कवि बताता है कि सुबह का आकाश ऐसा लगता है मानो नीला शंख हो। दूसरे शब्दों में, इस समय आसमान शंख के समान गहरा नीला लगता है। वह पवित्र दिखाई देता है। वातावरण में नमी प्रतीत होती है। सुबह-सुबह आकाश ऐसा लगता है मानो राख से लीपा हुआ कोई चौका है। यह चौका नमी के कारण गीला लगता है।
विशेष-

(i) कवि ने प्रकृति का मनोहारी चित्रण किया है।
(ii) ‘शंख जैसे’ में उपमा अलंकार है।
(iii) सहज व सरल शब्दों का प्रयोग किया है।
(iv) ग्रामीण परिवेश सजीव हो उठता है।
(v) नए उपमानों का प्रयोग है।

प्रश्न

(क) प्रात:कालीन आकाश की तुलना किससे की गई हैं और क्यों?
(ख) 
कवि ने भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौंका क्यों कहा हैं?
(ग)
 ‘अभी गीला पड़ा हैं’-से क्या तात्पय हैं?
(घ) 
प्रात:कालीन नभ के लिए कवि ने किन उपमानों का प्रयोग किया हैं?

उत्तर-

(क) प्रात:कालीन आकाश की तुलना नीले शंख से की गई है, क्योंकि वह शंख के समान पवित्र माना गया है।
(ख) कवि ने भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौका इसलिए कहा है, क्योंकि भोर का नभ सफेद व नीले रंग से मिश्रित दिखाई देता है।
(ग) इसका अर्थ यह है कि प्रात:काल में ओस की नमी होती है। गीले चौके में भी नमी होती है। अत: नीले नभ को गीला बताया गया है।
(घ) प्रात:कालीन नभ के लिए कवि ने दो उपमानों का प्रयोग किया है-(i) नीला शंख, (ii) राख से लीपा चौका। ये उपमान सर्वथा नवीन हैं।

2.

बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने                         (पृष्ठ-36)

शब्दार्थ- सिल –मसाला पीसने के लिए बनाया गया पत्थर। केसर- विशेष फूल। मल देना- लगा देना।
प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित ‘उषा’ कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। इस कविता में कवि ने सूर्योदय से पहले के वातावरण का सुंदर चित्र उकेरा है। कविता के इस अंश में सूर्योदय का मनोहारी चित्रण किया गया है।
व्याख्या-कवि प्रात:कालीन आकाश का वर्णन करते हुए कहता है कि सूर्य क्षितिज से ऊपर उठता है तो हलकी लालिमा की रोशनी फैल जाती है। ऐसा लगता है कि काली रंग की सिल को लाल केसर से धो दिया गया है। अँधेरा काली सिल तथा सूरज की लाली केसर के समान लगती है। इस समय आकाश ऐसा लगता है मानो काली स्लेट पर किसी ने लाल खड़िया मिट्टी मल दिया हो। अँधेरा काली स्लेट के समान व सुबह की लालिमा लाल खड़िया चाक के समान लगती है।
विशेष-

(i) कवि ने प्रकृति का मनोहारी वर्णन किया है।
(ii) पूरे काव्यांश में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(iii) मुक्तक छंद का प्रयोग है।
(iv) नए बिंबों व उपमानों का प्रयोग है।
(v) सरल, सहज खड़ी बोली में सुंदर अभिव्यक्ति है।

प्रश्न

(क) आसमान का सौंदर्य दशनेि के लिए कवि ने किन उपमानों का प्रयोग किया हैं?
(ख) 
कवि ने किस समय का चित्रण किया हैं?
(ग) 
कवि काली सिल और लाल केसर के माध्यम से क्या कहना चाहता हैं?
(घ) 
कवि ने प्रातःकालीन सौंदर्य का चित्रण किस प्रकार किया है ?

उत्तर-

(क) आसमान का सौंदर्य दर्शाने के लिए कवि ने सिल और स्लेट उपमानों के माध्यम से प्रात:कालीन नभ के लाल-लाल धब्बों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है।
(ख) कवि ने सूर्योदय से पहले के भोर का चित्रण किया है।
(ग) कवि ने अँधेरे को काली सिल माना है। सुबह की किरणें लालिमायुक्त होती हैं। ऐसे में सूर्योदय से ऐसा लगता है मानो किसी ने काली सिल को लाल केसर से धो दिया है।
(घ) कवि ने प्रात:कालीन सौंदर्य को काली स्लेट, लाल केसर, लाल खड़िया चाक के उपमानों के माध्यम से चित्रित किया है। प्रात:कालीन ओस व नमी के माध्यम से काली सिल को लाल केसर से घुलना बताया गया है।

3.

नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।

और …….
जादू टूटता हैं इस उषा का अब 
सूर्योदय हो रहा हैं। (पृष्ठ-36)

शब्दार्थ- गौर-गोरी। झिलमिल- मचलती हुई। देह– शरीर। जादू- आकर्षण, सौंदर्य। उषा- प्रात:काल। सूर्योदय- सूर्य का उदय होना।
प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2‘ में संकलित ‘उषा’ कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। कवि ने सूर्योदय से पहले के वातावरण का सुंदर चित्र उकेरा है। इसमें सूर्योदय का मनोहारी चित्रण किया गया है।
व्याख्या- कवि ने भोर के पल-पल। बदलते दृश्य का सुंदर वर्णन किया है। वह कहता है कि सूर्योदय के समय आकाश में गहरा नीला रंग छा जाता है। सूर्य की सफेद आभा दिखाई देने लगती है। ऐसा लगता है मानो नीले जल में किसी गोरी सुंदरी की देह हिल रही हो। धीमी हवा व नमी के कारण सूर्य का प्रतिबिंब हिलता-सा प्रतीत होता है।
कुछ समय बाद जब सूर्योदय हो जाता है तो उषा का पल-पल। बदलता सौंदर्य एकदम समाप्त हो जाता है। ऐसा लगता है कि उषा का जादुई प्रभाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
विशेष-

(i) कवि ने उषा का सुंदर दृश्य बिंब प्रस्तुत किया है।
(ii) माधुर्य गुण है।
(iii) ‘नील जल ’ हिल रही हो।’-में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(iv) सरल भाषा का प्रयोग है।
(v) मुक्तक छंद है।

प्रश्न

(क) गोरी देह के झिलमिलाने की समानता किससे की गई हैं?
(ख) उषा का जादू कैसा है?
(ग) उषा का जादू टूटने का तात्पय बताइए।
(घ) उषा का जादू कब टूटता हैं?

उत्तर-

(क) गोरी देह के झिलमिलाने की समानता सुबह के सूर्य से की गई है। सुबह वातावरण में नमी तथा स्वच्छता होने के कारण सूर्य चमकता प्रतीत होता है।
(ख) उषा का जादू अद्भुत है। सुबह का सूर्य ऐसा लगता है मानो नीले जल में गोरी युवती का प्रतिबिंब झिलमिला रहा हो। यह जादू जैसा लगता है।
(ग) उषाकाल में प्राकृतिक सौंदर्य अति शीघ्रता से बदलता रहता है। सूर्य के आकाश में चढ़ते ही उषा का सौंदर्य समाप्त हो जाता है। ऐसा लगता है कि उषा का जादू समाप्त हो गया है।
(घ) सूर्य के उदय होते ही उषा का जादू टूट जाता है। सूर्य की किरणों से आकाश में छाई लालिमा समाप्त हो जाती है।

काव्य-सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है )
बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक

मल  दी हो  किसी ने
नील जल मै या किसी की
गौर श्लिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।
और…..
जादू टूटता हैं इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा हैं।

प्रश्न 1:

(क) काव्यांश में प्रयुक्त उपमानों का उल्लेख कीजिए।
(ख) कविता की भाषागत दो विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

अथवा

 किन उपमानों से पता चलता है कि गाँव की सुबह का वर्णन हैं?
(ग) भाव–संदर्य स्पष्ट कीजिए—

नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।

उत्तर-

(क) काव्यांश में निम्नलिखित उपमान प्रयुक्त किए गए हैं-

(i) नीला शंख (सुबह के आकाश के लिए)।
(ii) राख से लीपा हुआ चौका (भोर के नभ के लिए)।
(iii) काली सिल (अँधेरे से युक्त आसमान के लिए)।
(iv) स्लेट पर लाल खड़िया चाक (भोर से नमीयुक्त वातावरण में उगते सूरज की लाली के लिए)।
(v) नीले जल में झिलमिलाती गोरी देह (नीले आकाश में आते सूरज के लिए)।

(ख)

(i) कवि ने नए उपमानों का प्रयोग किया है।
(ii) ग्रामीण परिवेश का सहज शब्दों में चित्रण।

अथवा

निम्नलिखित उपमानों से पता चलता है कि यह गाँव की सुबह का वर्णन है-

(i) राख से लीपा हुआ चौका
(ii) बहुत काली सिल पर किसी ने लाल केसर मल दिया हो।

(ग) कवि कहना चाहता है कि सुबह सूर्योदय से पहले नीले आकाश में नमी होती है। स्वच्छ वातावरण के कारण सूर्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे नीले जल में गोरी युवती की सुंदर देह झिलमिला रही है।

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

प्रश्न 2:

(क) कोष्ठकों के प्रयोग से कविता में क्या विशेषता आ गई है? समझाइए।
(ख) काव्यांश में आए किन्हीं दो अलकारों का नामोल्लेख करते हुए उनसे उत्पन्न सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ग) उपयुक्त कविता में आए किस द्वश्य बिब से आप सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और क्यों?

उत्तर-

(क) कवि ने कोष्ठकों का प्रयोग किया है। कोष्ठक अतिरिक्त जानकारी प्रदान करते हैं; जैसे कविता में कोष्ठक में दी गई जानकारी (अभी गीला पड़ा है) से आसमान की नमी व ताजगी की जानकारी मिलती है।
(ख) काव्यांश में ‘शंख जैसे’ में उपमा तथा ‘बहुत काली सिल ’ गई हो।’ में उत्प्रेक्षा अलंकार है। इनसे आकाश की पवित्रता व प्रात: के समय का मटियालापन प्रकट होता है।
(ग) इस काव्यांश में हम नीले जल में गोरी देह के झिलमिलाने के बिंब से अधिक प्रभावित हुए। सुबह नीला आकाशस्वच्छ होता है। नमी के कारण दृश्य हिलते प्रतीत होते हैं। श्वेत सूर्य का बिंब आकाश में सुंदर प्रतीत होता है।

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

कविता के साथ

1.

कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र है।

अथवा

‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र है-सोदाहरण प्रतिपादित कीजिए।

उत्तर-
कवि के नीले शंख, राख से लीपा हुआ गीला चौका, सिल, स्लेट, नीला जल और गोरी युवती की मखमली देह आदि उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्द चित्र है। इन्हीं उपमानों के माध्यम से कवि ने सूर्योदय का गतिशील वर्णन किया है। ये उपमान भी कविता को गति प्रदान करते हैं।

2.

भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
नयी कविता में कोष्ठक, विराम-चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता हैं। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्टकों से कविता में विशेष अर्थ पैदा हुआ है ? समझाइय।

उत्तर-

नयी कविता के कवियों ने नए-नए प्रयोगों से स्वयं को अलग दिखाना चाहा है। शमशेर बहादुर सिंह ने कोष्ठकों का प्रयोग किया है। कोष्ठकों में दी गई सामग्री मुख्य सामग्री से संबंधित है तथा पूरक का काम करती है। वह कथन को स्पष्टता प्रदान करती है। यहाँ (अभी गीला पड़ा है) वाक्य कोष्ठकों में दिया गया है जो प्रात:कालीन सुबह की नमी व ताजगी को व्यक्त करता है। कोष्ठकों से पहले के वाक्य से काम की पूर्णता का पता तो चलता है, परंतु स्थिति स्पष्ट नहीं होती। गीला पड़ने से कथन अधिक प्रभावपूर्ण बन जाता है।

अपनी रचना

●  अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूयस्ति का शब्द-चित्र खींचिए।

उत्तर-

सुबह के समय सूर्य उदित होते समय ऐसा लगता है मानो कोई नीले सरोवर में स्नान करके बाहर आ रहा हो। सूर्य की किरणें धीरे-धीरे आकाश पर छा जाती हैं। ओस के कणों पर सूर्य की किरणें अद्भुत दृश्य उत्पन्न करती हैं तथा प्रकृति के दृश्य पल-पल में बदलते हैं। पक्षी चहचहाने लगते हैं। पशुओं व मानवों में नयी शक्ति का संचार हो जाता है। जीवन सजीव हो उठता है।
जैसे-जैसे शाम होती है, सूर्य एक थके हुए पथिक की भाँति धीमी गति से अस्त होने लगता है। पक्षी अपने घरों की तरफ लौटने लगते हैं। सूर्य का रंग लाल हो जाता है मानो वह विश्राम करने जा रहा हो। सारा जीव-जगत भी आराम करने की तैयारी शुरू कर देता है।

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

अन्य हल प्रश्न

लघूत्तरात्मक प्रश्न

1.

सूर्योदय से पहले आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? ‘उषा’ कविता के आधार पर बताइए। 

अथवा

‘उषा’ कविता के आधार पर सूर्योदय से ठीक पहले के प्राकृतिक दूश्यों का चित्रण कीजिए।

उत्तर-

सूर्योदय से पहले आकाश का रंग शंख जैसा नीला था, उसके बाद आकाश राख से लीपे चौके जैसा हो गया। सुबह की नमी के कारण वह गीला प्रतीत होता है। सूर्य की प्रारंभिक किरणों से आकाश ऐसा लगा मानो काली सिल पर थोड़ा लाल केसर डालकर उसे धो दिया गया हो या फिर काली स्लेट पर लाल खड़िया मिट्टी मल दी गई हो। सूर्योदय के समय सूर्य का प्रतिबिंब ऐसा लगता है जैसे नीले स्वच्छ जल में किसी गोरी युवती का प्रतिबिंब झिलमिला रहा हो।

2.

‘उषा’ कविता के आधार पर उस जादू को स्पष्ट कीजिए जो सूर्योदय के साथ टूट जाता है।

उत्तर-

सूर्योदय से पूर्व उषा का दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है। भोर के समय सूर्य की किरणें जादू के समान लगती हैं। इस समय आकाश का सौंदर्य क्षण-क्षण में परिवर्तित होता रहता है। यह उषा का जादू है। नीले आकाश का शंख-सा पवित्र होना, काली सिल पर केसर डालकर धोना, काली स्लेट पर लाल खड़िया मल देना, नीले जल में गोरी नायिका का झिलमिलाता प्रतिबिंब आदि दृश्य उषा के जादू के समान लगते हैं। सूर्योदय होने के साथ ही ये दृश्य समाप्त हो ज़ाते हैं।

3.

‘स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने। ‘ -इसका आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-

कवि कहता है कि सुबह के समय अँधेरा होने के कारण आकाश स्लेट के समान लगता है। उस समय सूर्य की लालिमा-युक्त किरणों से ऐसा लगता है जैसे किसी ने काली स्लेट पर लाल खड़िया मिट्टी मल दिया हो। कवि आकाश में उभरे लाल-लाल धब्बों के बारे में बताना चाहता है।

4.

भार के नभ को ‘ राख से लीपा, गीला चौका ‘ की संज्ञा दी गई है। क्यों ?

उत्तर-

कवि कहता है कि भोर के समय ओस के कारण आकाश नमीयुक्त व धुंधला होता है। राख से लिपा हुआ चौका भी मटमैले रंग का होता है। दोनों का रंग लगभग एक जैसा होने के कारण कवि ने भोर के नभ को ‘राख से लीपा, गीला चौका’ की संज्ञा दी है। दूसरे, चौके को लीपे जाने से वह स्वच्छ हो जाता है। इसी तरह भोर का नभ भी पवित्र होता है।

5.

‘उषा’ कविता में प्रातःकालीन आकाश की पवित्रता, निर्मलता व उज्ज्वलता से संबंधित पंक्तियों को बताइए।

उत्तर-

पवित्रता- राख से लीपा हुआ चौका।
निर्मलता- बहुत काली सिल जरा से केसर से/कि जैसे धुल गई हो।
उज्ज्वलता-

नीले जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।

6.

सिल और स्लेट का उदाहारण देकर कवि ने आकाश के रंग के बारे में क्या कहा है ?

उत्तर-

कवि ने सिल और स्लेट के रंग की समानता आकाश के रंग से की है। भोर के समय आकाश का रंग गहरा नीला-काला होता है और उसमें थोड़ी-थोड़ी सूर्योदय की लालिमा मिली हुई होती है।

7.

‘उषा’ कविता में भोर के नभ की तुलना किससे की गई हैं और क्यों?

उत्तर-

‘उषा’ कविता में प्रात:कालीन नभ की तुलना राख से लीपे गए गीले चौके से की गई है। इस समय आकाश नम एवं धुंधला होता है। इसका रंग राख से लिपे चूल्हे जैसा मटमैला होता है। जिस प्रकार चूल्हा-चौका सूखकर साफ़ हो जाता है उसी प्रकार कुछ देर बाद आकाश भी स्वच्छ एवं निर्मल हो जाता है।

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

स्वर्य करें

1. ‘उषा’ कविता में कवि ने आसमान के लिए सर्वथा नवीन उपमानों का प्रयोग किया है। कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
2. कवि ने प्रात:कालीन प्रकृति का मनोहारी चित्रण किया है। पाठ के आधार पर उदाहरण सहित लिखिए।
3. ‘उषा के टूटते जादू’ का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

अथवा

‘जादू टूटता है इस उषा का अब।’ उषा का जादू क्या है? वह कैसे टूटता है?
4. निम्नलिखित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।
और…….
जादू टूटता है इस उषा का अब सूर्योदय हो रहा है।

(क) उषा का जादू किस तरह टूट रहा हैं?
(ख) भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ग) भाषागत दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 6, class 12 Hindi Aroh chapter 6 solutions

NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6: Download PDF

NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6-काव्य भाग – उषा

Download PDF: NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 6-काव्य भाग – उषा PDF

Chapterwise NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh :

About NCERT

The National Council of Educational Research and Training is an autonomous organization of the Government of India which was established in 1961 as a literary, scientific, and charitable Society under the Societies Registration Act. Its headquarters are located at Sri Aurbindo Marg in New Delhi. Visit the Official NCERT website to learn more.

NCERT Solutions for All Classes (1 to 12)

Jump to free NCERT solutions, chapter Q&A, and textbooks for any grade

Popular Reference Solutions & Help Books

Step-by-step solutions for Mathematics and Science reference textbooks

Latest School & Board Updates

Real-time date sheets, admit cards, syllabus revisions, and exam notifications

Haryana Board Senior Secondary (12th) 20 Feb 2025
HBSE 12th 2024 Question Papers
View
Haryana Board Secondary (10th) 20 Feb 2025
HBSE 10th 2024 Question Papers
View
Haryana Board Senior Secondary (12th) 19 Feb 2025
HBSE 9th Model Papers 2025
View
Haryana Board Senior Secondary (12th) 19 Feb 2025
HBSE 11th Model Papers 2025
View
State Board Primary (1-5) 15 Feb 2025
BHU SET 2025 Application Form
View

Frequently Asked Questions

Common queries regarding NCERT textbook solutions & school curriculum

Are these NCERT solutions available 100% free of charge?

Yes. All NCERT solutions, chapter questions, textbook exercises, and download guides published on IndCareer Schools are completely free for students, parents, and educators without requiring any paid subscription or login.

Which subjects are covered for this class?

For Class 1, comprehensive NCERT solutions are provided for Mathematics (Math-Magic / गणित का जादू), English (Marigold & Mridang), and Hindi (Rimjhim / रिमझिम), alongside printable worksheets and textbook PDF downloads.

Are these solutions updated according to the latest CBSE / NCERT guidelines?

Yes. Our academic editorial team continually aligns all solutions and textbook references with the latest National Education Policy (NEP) and the rationalized curriculum issued by NCERT and the Central Board of Secondary Education (CBSE).

How can I download the official NCERT books in PDF format?

You can access official NCERT textbooks by clicking on the textbook links provided in the study content section above or by visiting the Class 1 to 12 NCERT Directory on IndCareer Schools.